उत्तराखंड की बहुप्रतीक्षित ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना ने 11 सितंबर 2026 को 41वीं टनल ब्रेकथ्रू हासिल की। इस उपलब्धि के साथ एस्केप टनल-1 का निर्माण पूरा हुआ, जो कठिन हिमालयी भूगर्भीय परिस्थितियों में चल रही इस महत्वाकांक्षी रेल लाइन के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है।
125 किलोमीटर लंबी यह ब्रॉड-गेज रेल लाइन रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) द्वारा रेल मंत्रालय के तहत विकसित की जा रही है। परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 37,000 करोड़ रुपये है और इसका लक्ष्य दिसंबर 2029 तक पूरा करना है। सितंबर 2026 तक परियोजना की भौतिक प्रगति 78 प्रतिशत तक पहुंच चुकी थी, जबकि सुरंग खुदाई का लगभग 97 प्रतिशत काम पूरा हो गया था।
यह रेल लाइन ऋषिकेश को कर्णप्रयाग से जोड़ते हुए गढ़वाल क्षेत्र में आवागमन को आसान बनाएगी। पर्वतीय इलाकों में रेल संपर्क बढ़ने से न केवल यात्रा समय घटेगा, बल्कि आपदा प्रबंधन, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
इस परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती इसका भूगर्भीय वातावरण है। सुरंग का ब्रेकथ्रू अत्यधिक टेक्टोनाइज्ड, बहु-वलित और बड़े पैमाने पर फॉल्टेड चट्टानों के बीच हुआ। मार्ग में मेन बाउंड्री थ्रस्ट के पास मोटी मायलोनाइट जोन भी शामिल रही, जो हिमालय की प्रमुख भूवैज्ञानिक भ्रंश रेखाओं में से एक है।
ऐसे क्षेत्रों में सुरंग निर्माण के लिए नियंत्रित ब्लास्टिंग, मजबूत सपोर्ट सिस्टम, निरंतर भूवैज्ञानिक निगरानी, वेंटिलेशन और ड्रेनेज व्यवस्था की जरूरत होती है। इसी कारण हिमालयी सुरंग परियोजनाएं तकनीकी रूप से बेहद जटिल मानी जाती हैं।