पहाड़ों में गुलदार का बढ़ता आतंक: 7 साल की मासूम की मौत, कोटद्वार में 8 वर्षीय बच्ची पर हमला, ग्रामीणों ने विधायक को घेरा

पौड़ी जिले के खांडूसैंण में गुलदार ने घर के आंगन से सात वर्षीय बच्ची को उठाकर मार डाला, वहीं कोटद्वार के सनेह क्षेत्र में आठ वर्षीय बच्ची पर हमला कर उसे घायल कर दिया। लगातार बढ़ते हमलों से ग्रामीणों में दहशत और आक्रोश है। खांडूसैंण में आक्रोशित ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचे भाजपा विधायक की गाड़ी को करीब डेढ़ घंटे तक घेरे रखा। ग्रामीण गुलदार को पकड़ने या मारने, प्रभावित परिवार को मुआवजा देने और गांवों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग कर रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में उत्तराखंड में गुलदार के हमलों में 219 लोगों की मौत और 1,019 लोग घायल हुए हैं।

उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में मानव-वन्यजीव संघर्ष अब खतरनाक मोड़ ले चुका है। जंगल से निकलकर गुलदार अब सीधे बस्ती और रिहायशी इलाकों में घुसकर हमले कर रहा है।

ताजा मामला पौड़ी जिले के खांडूसैंण क्षेत्र का है, जहां गुलदार के हमले में सात वर्षीय बच्ची की दर्दनाक मौत के बाद ग्रामीणों का सब्र टूट गया। आक्रोशित ग्रामीणों ने क्षेत्रीय भाजपा विधायक को घेर लिया और करीब डेढ़ घंटे तक उनकी गाड़ी को बंधक बनाए रखा। मौके पर पुलिस के समझाने के बाद भी लोग शांत नहीं हुए।

जानकारी के अनुसार, खांडूसैंण में शाम के समय बच्ची घर के आंगन में थी, तभी घात लगाए बैठे गुलदार ने उस पर हमला कर दिया और उसे घसीटकर झाड़ियों में ले गया। परिजनों के शोर मचाने पर ग्रामीण जुटे, लेकिन तब तक मासूम की मौत हो चुकी थी। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत और आक्रोश दोनों फैल गए।

ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले एक साल में पौड़ी, अल्मोड़ा, टिहरी और नैनीताल जिलों में गुलदार के हमलों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। पहले गुलदार रात में जंगल के किनारे हमला करता था, लेकिन अब उसका पैटर्न बदल गया है। वह दिन-दहाड़े गांव की बस्ती, बाजार, स्कूल के रास्ते और घरों के आंगन में घुसकर बच्चों और महिलाओं को निशाना बना रहा है। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस साल अब तक उत्तराखंड में गुलदार के हमले में 20 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें अधिकतर 5 से 12 वर्ष के बच्चे हैं।

घटना की सूचना पर जब स्थानीय भाजपा विधायक मौके पर पहुंचे तो ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा। महिलाओं ने विधायक की गाड़ी को चारों ओर से घेर लिया और वन विभाग व सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों ने कहा कि कई बार वन विभाग को पिंजरा लगाने और गश्त बढ़ाने की मांग की गई, लेकिन केवल कागजी आश्वासन मिला।

स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि विधायक को सुरक्षा कारणों से करीब डेढ़ घंटे तक अपनी गाड़ी में ही बैठे रहना पड़ा। पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन आक्रोशित ग्रामीण पुख्ता कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे।

ग्रामीणों की मांग है कि आदमखोर घोषित कर गुलदार को तुरंत पकड़ा या मारा जाए, प्रभावित परिवार को 10 लाख का मुआवजा दिया जाए, गांव में सोलर फेंसिंग, स्ट्रीट लाइट और वन विभाग की स्थायी टीम तैनात की जाए।

यह घटना एक बार फिर बताती है कि पहाड़ में पलायन, जंगलों में घटता शिकार और बस्तियों के पास बढ़ती झाड़ियां गुलदार को मानव बस्ती की ओर धकेल रही हैं। यदि समय रहते मानव-वन्यजीव संघर्ष के लिए ठोस नीति नहीं बनी, तो खांडूसैंण जैसी घटनाएं और बढ़ेंगी।

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