यूपी में एनडीए सहयोगी दलों ने तेज की आरक्षण की मांग, चुनाव से पहले कहीं खेला ना हो जाए

उत्तर प्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव अभी कुछ समय दूर है, लेकिन एनडीए के सहयोगी दलों ने अपनी सियासी ताकत दिखानी शुरू कर दी है। इसके लिए आरक्षण से जुड़े मुद्दे को जोरशोर से उछाला जा रहा है। निषाद पार्टी के नेता और मंत्री संजय निषाद ने कहा कि निषाद समुदाय को अनुसूचित जाति (SC) आरक्षण सूची में शामिल किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा न करने से गठबंधन की 2027 की चुनावी संभावनाओं को नुकसान पहुंच सकता है। संजय निषाद ने कहा, ‘जब राम मंदिर और अनुच्छेद 370 जैसे बड़े मुद्दों का समाधान हो चुका है, तो निषादों को एससी का दर्जा देना कोई मुश्किल काम नहीं होना चाहिए।

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के नेता और मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में उप-वर्गीकरण का मुद्दा उठाया है। उन्होंने रोहिणी आयोग की रिपोर्ट को उत्तर प्रदेश में लागू करने की मांग की है। राजभर ने इकोनॉमिक टाइम्स से कहा, ‘कुछ ही जातियां 27% ओबीसी कोटे का पूरा लाभ ले रही हैं। सुप्रीम कोर्ट से कोटे के भीतर कोटा की इजाजत मिल चुकी है। हरियाणा ने इसे लागू भी कर दिया है तो यूपी में क्यों नहीं?’ राजभर ने यह मुद्दा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने उठाया है और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की योजना बना रहे हैं।

इसके अलावा, ओम प्रकाश राजभर की नजर अब मऊ सदर विधानसभा सीट पर है, जो उनके पार्टी विधायक अब्बास अंसारी की सजा के बाद खाली हो गई है। चर्चा है कि वे इस सीट पर अपने बेटे अरविंद राजभर को उतारना चाहते हैं। सुभासपा चीफ ने कहा, ‘मुस्लिमों के बाद राजभर मऊ सदर में सबसे बड़ा समूह हैं, करीब 80 हजार। हम इस सीट पर चुनाव लड़ेंगे।’ इस बीच, अपना दल के आशीष पटेल ने भी हाल ही में राज्य सरकार के साथ कुछ मुद्दे उठाए हैं, जो गठबंधन के भीतर तनाव के संकेत दे रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि तनाव किस हद तक आगे जाता है।

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