सैकड़ों छोटे व्यापारियों और दुकानदारों को लाखों रुपये भुगतान करने के लिए जीएसटी का नोटिस दिया गया है. इससे उनमें हड़कंप है. साथ ही कई लोग अचानक की गई कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं और उन्हें अपनी आजीविका खोने का डर सता रहा है.
इस बारे में राजाजीनगर में जूस और कन्फेक्शनरी की एक छोटी सी दुकान चलाने वाले राघवेंद्र शेट्टी को वर्ष 2021-22 से 2024-25 तक के लिए ब्याज सहित 65.45 लाख रुपये का जीएसटी नोटिस मिला है.
नोटिस में चेतावनी दी गई है कि यदि 21 जुलाई तक राशि का भुगतान नहीं किया गया तो उनके बैंक खाते फ्रीज कर दिए जाएंगे.
राघवेंद्र अब मदद के लिए स्थानीय जीएसटी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं. राघवेंद्र ने कहा, “मेरी एक छोटी सी दुकान है. मैं घर चलाने लायक भी नहीं कमा पाता. मैं 65 लाख रुपये कैसे चुका पाऊंगा? अगर मैं अपना सब कुछ बेच भी दूं, तो भी इतने पैसों का इंतज़ाम नहीं कर पाऊंगा.”
राघवेंद्र की तरह, बेंगलुरु में छोटी बेकरियों, पान की दुकानों, चाय की दुकानों, किराना और मसालों की दुकानों के कई मालिकों को भी इसी तरह के नोटिस मिले हैं.
वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा एकत्रित यूपीआई लेनदेन डेटा के आधार पर टैक्स की मांग 20 लाख रुपये से 75 लाख रुपये तक है.
कार्मिक परिषद के सदस्य नागराज शेट्टी ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि उनके भाई को भी 50 लाख रुपये का नोटिस मिला है, जबकि उन्होंने तीन साल पहले अपनी बेकरी बेच दी थी.
शेट्टी ने सवाल किया, “सरकार ने पिछले चार सालों में कोई कार्रवाई क्यों नहीं की? अचानक वे लाखों में टैक्स क्यों लगा रहे हैं?”
नोटिस को छोटे व्यवसायों के प्रति अन्याय बताते हुए उन्होंने कहा, “हम ऋण लेते हैं, कड़ी मेहनत करते हैं और गुज़ारा करते हैं. टैक्स चुकाने के बाद हमारी कमाई बमुश्किल कुछ होती है. इस तरह के नोटिस पेट पर लात मारने जैसा है.”
वहीं इस बारे में कर्नाटक के वाणिज्यिक कर विभाग के आयुक्त विपुल बंसल ने स्पष्ट किया कि ये नोटिस अंतिम मांग नहीं हैं. उन्होंने कहा, “जीएसटी अधिनियम की धारा 22 के अनुसार, 40 लाख रुपये (सेवा प्रदाताओं के लिए 20 लाख रुपये) से अधिक वार्षिक कारोबार वाले व्यवसायों को जीएसटी के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य है. ये नोटिस यूपीआई प्लेटफॉर्म के लेनदेन रिकॉर्ड पर आधारित हैं.”
उन्होंने आगे कहा कि दुकानदारों को अपने लेन-देन का विवरण जमा करने के लिए अपने स्थानीय जीएसटी कार्यालय जाना चाहिए. उन्होंने बताया, “ब्रेड जैसी कई कर-मुक्त वस्तुएं हैं. अगर दुकानदार रिकॉर्ड उपलब्ध कराएं, तो छूट वाली वस्तुओं को छोड़कर कर की पुनर्गणना की जाएगी.”
आयुक्त ने यह भी बताया कि 1.5 करोड़ रुपये से कम टर्नओवर वाले छोटे व्यापारी कंपोजिशन स्कीम का विकल्प चुन सकते हैं, जिसके तहत उन्हें भविष्य में अपने टर्नओवर का केवल 1 प्रतिशत ही कर के रूप में देना होगा.
सरकारी आश्वासनों के बावजूद, दुकानदार चिंतित और असमंजस में हैं. कार्मिक परिषद तत्काल राहत की मांग करते हुए मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को एक ज्ञापन सौंपने की तैयारी कर रही है. नागराज ने कहा, “अगर यह मुद्दा जल्द ही हल नहीं हुआ तो हम पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे