श्रद्धालुओं का 12वां जत्था सोमवार सुबह श्री अमरनाथ जी की पवित्र गुफा की तीर्थयात्रा के लिए पहलगाम के नुनवान आधार शिविर से रवाना हुआ. श्रद्धालु पवित्र गुफा मंदिर में बाबा भोलेनाथ के दर्शन के लिए श्रद्धालु लगातार आ रहे हैं. हाल की आतंकी घटनाओं के बाद भी श्रद्धालुओं में गजब का उत्साह देखा जा रहा है. जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के अनुसार अब तक 2 लाख से अधिक श्रद्धालु इस पवित्र यात्रा में शामिल हो चुके हैं.
मुंबई से आए एक श्रद्धालु ने कहा, ‘हम सात सदस्य हैं. हम पहली बार आ रहे हैं. खाने-पीने और सोने की उचित व्यवस्था की गई है, लेकिन बारिश के कारण हमें परेशानी हो रही है. यहां लोग अच्छे हैं. हम महाराष्ट्र के लोगों के कल्याण के लिए प्रार्थना करेंगे.’ एक अन्य श्रद्धालु ने कहा कि यह उनका छठा दर्शन है. उन्होंने यहाँ की सुरक्षा व्यवस्था की सराहना की.
एक अन्य श्रद्धालु ने कहा, ‘मैं महाराष्ट्र से आया हूँ और यह मेरी छठी यात्रा है. मैं यहाँ 98 लोगों के साथ आया हूँ. पिछले साल मैं 150 लोगों के साथ आया था. मैं हर साल यहाँ आऊँगा. व्यवस्थाएँ बहुत अच्छी हैं. यहाँ बहुत उत्साह है. हम दुनिया में शांति के लिए प्रार्थना करेंगे. कश्मीर के लोग बहुत सहयोगी हैं. श्रद्धालुओं को बिना किसी भय के इस यात्रा में शामिल होना चाहिए. जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि इस पवित्र यात्रा में अब तक 2 लाख से अधिक लोग भगवान शिव के दर्शन कर चुके हैं.
एक्स पर एक पोस्ट में एलजी सिन्हा ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा, ‘यह जीवन भर की एक पवित्र यात्रा है. मैं सभी भक्तों का दिव्यता की खोज और अनुभव करने के लिए स्वागत करता हूं. हर हर महादेव!’ दक्षिण कश्मीर में 3880 मीटर ऊंचे पवित्र गुफा मंदिर के लिए 38 दिवसीय वार्षिक अमरनाथ तीर्थयात्रा 3 जुलाई को शुरू हुई और 9 अगस्त को समाप्त होगी.
यह तीर्थयात्रा पहलगाम मार्ग (अनंतनाग जिला) और बालटाल मार्ग (गंदरबल जिला) दोनों के माध्यम से एक साथ हो रही है. अमरनाथ यात्रा अमरनाथ गुफा की एक वार्षिक तीर्थयात्रा है, जहां भक्त बर्फ से बने एक स्तंभ के सामने पूजा अर्चना करते हैं. इसे ही भगवान शिव का रूप माना जाता है.
बर्फ का यह स्तंभ हर साल गर्मियों के महीनों में बनता है और जुलाई और अगस्त में अपने अधिकतम आकार पर पहुंच जाता है, जब हजारों हिंदू श्रद्धालु गुफा की वार्षिक तीर्थयात्रा करते हैं. सुरक्षा बलों ने इस यात्रा को सुचारू और सुरक्षित बनाने के लिए ‘ऑपरेशन शिव 2025’ शुरू किया है.
इस वार्षिक तीव्र गति वाले अभियान का उद्देश्य उत्तरी और दक्षिणी यात्रा मार्गों पर मजबूत सुरक्षा ढांचा उपलब्ध कराना है. विशेष रूप से ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान समर्थित नापाक आतंकवादियों से बढ़े खतरे के मद्देनजर. इस वर्ष के उन्नत सुरक्षा ढाँचे के तहत, 8500 से अधिक सैनिकों को तैनात किया गया है.
एक गतिशील आतंकवाद-रोधी गलियारा सुरक्षा उपाय के रूप में स्थापित किए गए हैं. इसके अलावा आपदा प्रबंधन और आपातकालीन व्यवस्था की गई है. भारतीय सेना के प्रयासों में ड्रोन खतरों को बेअसर करने के लिए 50 से अधिक सी-यूएएस और ईडब्ल्यू प्रणालियों के साथ एक काउंटर-यूएएस ग्रिड लगाए गए हैं.